221 2121 1221 212
सारी शिकायतें ले आ तू बाब जोड़ के
अपने सितम भी साथ में ला ताब जोड़ के
लम्हें वो सारे बिसरे भी तू ला बटोर कर
रख सब मसाइलें भी तू नायाब जोड़ के
बादल न बारिशों न शफ़क़ सांझ से हुआ
पुरा हुआ है रंगे धनक आब जोड़ के
हर सूं है बिखरे-बिखरे बेतरतीब से खयाल
रख्खा है एक टूटा सा महताब जोड़ के
आने न देती आंखे इन्हें रात रात भर
दहलीज़ पर है नींदें हंसी ख्वाब जोड़ के
छप्पर पे खूब जोर से बरसा है झुम के
भेजा है रब ने कैसा ये अस्बाब जोड़ के
मसला नही है दैर हरम का कहीं मियां
रख्खा सियासतों ने है ये तेजाब जोड़ के
लगती नही खबर कोई मेरे अजीज की
भेजा है उनको खत में ही आदाब जोड़ के
बाब - अध्याय
ताब - प्रचंड तेज
आब - पानी
मसाइल =समस्या
शफक =चमक
धनक=इंद्रधनुष
महताब =चांद
अस्बाब - सामान
दैरो हरम =मंदिर मस्जिद
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