नजर मिजाज नजरिया कि तल्खियां देखूं
उलाहनों में मुहब्बत कहां कहां देखूं
सितमगरी में वो उस्ताद हैं जमाने में
कुछ ऐसे खबरों की मै रोज सुर्खियां देखूं
शरारतें हैं बहुत उनकी मुस्कुराहट में
लबों के जुम्बिशे इल्लत की शोखियां देखूं
वो हिचकियों में कहीं याद कर रहा शायद
खयाल ख्वाब में अब मै अना कहां देखूं
जरा सी आंच बची है जो दिल में रहने दो
दिली तमन्ना है हसरत धुंआ धुंआ देखूं
शरीक है वो मेरे जिस्म में महक बनकर
मै बेखबर हूँ उसे बस यहाँ वहाँ देखूं
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