Monday, 6 September 2021

बेबस यतीम लोग मिले सिसकियाँ मिली

221 2121 1221 212 
बेबस  यतीम  लोग  मिले  सिसकियाँ  मिली
दफ्तर  बदल बदल के  थकी अर्जियाँ मिली/1/

हाकिम तो कह रहा है कि सब ठीक ठाक है 
पूछे  तो  कोई   उससे   किसे  रोटियाँ मिली/2/

भेजी  गई  है  लानतें  दिल  खोल  कर  उसे
अखबार  में फिर आज  यही सुर्खियाँ मिली/3/

कहने  को  जी  रहे हैं मगर मर चुके हैं लोग
पड़ताल पर बदन में फकत पसलियाँ मिली/4/

हर बार  ख्वाब   झूठे  दिखाये  गये  हैं  बस
पर   दूर दूर   जिस्म  से   परछाईयाँ   मिली/5/

गुजरी   तमाम  उम्र   ही  बस  गज्ल गोई में
उसकी   वसीयतों  में   फकत  रद्दियाँ मिली/6/

मैले  ही  होंगे   रिश्ते   बनेंगे  अगर  लिबास
होकर  के  इस्तेमाल तो बस फब्तियाँ मिली/7/

रोया  तो  वक़्त  भी  मेरे  हालात  पर बहुत 
मेरी  वजह  से   ही  तुम्हे   दुश्वारियांँ  मिली/8/

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