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बेबस यतीम लोग मिले सिसकियाँ मिली
दफ्तर बदल बदल के थकी अर्जियाँ मिली/1/
हाकिम तो कह रहा है कि सब ठीक ठाक है
पूछे तो कोई उससे किसे रोटियाँ मिली/2/
भेजी गई है लानतें दिल खोल कर उसे
अखबार में फिर आज यही सुर्खियाँ मिली/3/
कहने को जी रहे हैं मगर मर चुके हैं लोग
पड़ताल पर बदन में फकत पसलियाँ मिली/4/
हर बार ख्वाब झूठे दिखाये गये हैं बस
पर दूर दूर जिस्म से परछाईयाँ मिली/5/
गुजरी तमाम उम्र ही बस गज्ल गोई में
उसकी वसीयतों में फकत रद्दियाँ मिली/6/
मैले ही होंगे रिश्ते बनेंगे अगर लिबास
होकर के इस्तेमाल तो बस फब्तियाँ मिली/7/
रोया तो वक़्त भी मेरे हालात पर बहुत
मेरी वजह से ही तुम्हे दुश्वारियांँ मिली/8/
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