Saturday, 2 January 2021

दिया मत करो यूँ नसीहत जियादा

122 122 122 122 
दिया   मत  करो   यूँ    नसीहत   जियादा
लगे  ना   भली    ऐसी   आदत   जियादा

गुनहगार   जो   जितना    ज्यादा   रहा है
उसी  में   झलकती    शराफत    जियादा

पशेमां   हुई    हर  कदम    जिंदगी   फिर 
थी  गुंजाइशें  कम    थी  चाहत   जियादा

गिना    रिज़्क  हमने    कई  बार   अपना 
लगी   हर  दफ़ा  ही    जरूरत    जियादा

बड़ी   गुफ्तगू   की   तेरी   याद   से  फिर 
कि  है  आजकल  यूँ  भी  फुर्सत जियादा

गरीबों   को    इसकी    इजाजत   नही है
हुई   अब  है  मंहगी    मुहब्बत   जियादा

कि  रहने दो  कुछ राज  आंखों में ही कैद
रिहाई  से  अच्छी      हिरासत     जियादा

ये  माना   बहुत  था  बुरा    साल लेकिन
किया कुछ तो हमने भी गफलत जियादा

परेशानियाँ     दी   है    उम्मीद   ने   बस
लगाओ  नही   आस  की  लत   जियादा

जियारत  इबादत  जो  करना है  कर लो
नही   मौत  के  पास   मोहलत  जियादा

था   बर्बादियों  में   पुरा  साल    शामिल
मगर  है  दिसम्बर  पे   तोहमत  जियादा

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