122 122 122 122
दिया मत करो यूँ नसीहत जियादा
लगे ना भली ऐसी आदत जियादा
गुनहगार जो जितना ज्यादा रहा है
उसी में झलकती शराफत जियादा
पशेमां हुई हर कदम जिंदगी फिर
थी गुंजाइशें कम थी चाहत जियादा
गिना रिज़्क हमने कई बार अपना
लगी हर दफ़ा ही जरूरत जियादा
बड़ी गुफ्तगू की तेरी याद से फिर
कि है आजकल यूँ भी फुर्सत जियादा
गरीबों को इसकी इजाजत नही है
हुई अब है मंहगी मुहब्बत जियादा
कि रहने दो कुछ राज आंखों में ही कैद
रिहाई से अच्छी हिरासत जियादा
ये माना बहुत था बुरा साल लेकिन
किया कुछ तो हमने भी गफलत जियादा
परेशानियाँ दी है उम्मीद ने बस
लगाओ नही आस की लत जियादा
जियारत इबादत जो करना है कर लो
नही मौत के पास मोहलत जियादा
था बर्बादियों में पुरा साल शामिल
मगर है दिसम्बर पे तोहमत जियादा
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