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सुखनवरो के दिलों को खंगाला जब हमने
कुछ अधजले मिले अशआर देखने के लिए/1/
बला का दर्द उढ़ेला है गज्ल गोई में
कि कौन कितना है गमख्वार देखने के लिए/2/
कभी जो जिंदगी की धूप ने सताया मुझे
निकल पड़ा मैं भी खुद्दार देखने के लिए/3/
जमात जात है पर आदमी नदारद है
कहाँ को जाए भला प्यार देखने के लिए/4/
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