Friday, 2 April 2021

कहीं कुछ बोलता कोई नही है

1222 1222 122 
कहीं   कुछ   बोलता   कोई  नही है
यहाँ  अब    आसरा   कोई   नही है/1/

सब अपने आप में  मशरूफ है बस
किसी   से   राब्ता    कोई    नही है/2/

खुदा  मिलने  लगे हैं हर कदम पर
मगर   इंसा   मिला   कोई   नही है/3/

मैं  ढूंढे  जा रहा हूँ जाने क्या क्या
मेरा  अपना   पता   कोई  नही है /4/
 
न की गल्ती कभी कोई हो जिसने
अब  इतना  पारसा  कोई  नही है/5/

यहीं आकर के सीखा है सभी ने
हमल  में  सीखता  कोई  नही है /6/

तमन्ना  आरजू  उम्मीद  है क्या
हूँ  सजदे  में  दुआ कोई नही है /7/

भला कैसे कहूँ खुद को सुखनवर
अदब  से  राब्ता   कोई  नही है/8/

कई मिल जाते हैं राहों में हर दिन
मगर  उनमें  मेरा  कोई  नही है /9/

गुजर जाते बगल से हादसों के
ठहर कर  देखता  कोई नही है /10/

भटकता है कहाँ ऐ दिल बता दो
किसे  है  ढूंढता  कोई  नही है /11/

जिधर देखो यहां मातम है पसरा
कहीं भी  शाद सा कोई नही है /12/

यूँ तो हर तर्फ खुश्बू है महक है
मुअत्तर  आप सा कोई नही है /13/

मैं खुद से दूर होता जा रहा हूँ
कि अब मुझमें मेरा कोई नही है /14/

No comments:

Post a Comment