2122 1122 1212 22
सारे आलम में है दहशत अजाब जैसा है
बात भी अच्छे दिनों की सराब जैसा है/1/
खार ही खार मिले हैं नसीब से हमको
कैसे हम कह दे भला ये गुलाब जैसा है/2/
पाक दामन कही मिलना भी ख्वाब ही तो है
आजकल चेहरे पे चेहरा नकाब जैसा है/3/
मसअला खूब है फिर भी नही कोई मसला
मसनदे साहिबो खातिर खिताब जैसा है/4/
जी करे पढ़ लो जहाँ से पलट के सफ्ह कोई
जिंदगी मेरी खुले इक किताब जैसा है /5/
मेरे इस मुल्क में बसते है सारे ही मजहब
मुल्क गुलशन में खिला इक गुलाब जैसा है/6/
No comments:
Post a Comment