Friday, 2 April 2021

सारे आलम में है दहशत अजाब जैसा है

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सारे  आलम  में  है  दहशत  अजाब जैसा है
बात  भी   अच्छे  दिनों  की   सराब  जैसा है/1/

खार  ही  खार  मिले  हैं   नसीब  से   हमको
कैसे   हम   कह दे  भला  ये  गुलाब जैसा है/2/

पाक दामन कही मिलना भी ख्वाब ही तो है
आजकल  चेहरे  पे  चेहरा   नकाब  जैसा है/3/

मसअला खूब है फिर भी  नही कोई मसला
मसनदे  साहिबो   खातिर  खिताब  जैसा है/4/

जी करे पढ़ लो जहाँ से पलट के सफ्ह कोई
जिंदगी   मेरी   खुले  इक   किताब  जैसा है /5/

मेरे  इस मुल्क में  बसते  है सारे ही मजहब
मुल्क गुलशन में खिला इक गुलाब जैसा है/6/

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