2122 2122 212
जिंदगी कुछ शादमानी दे मुझे
भुली बिसरी कुछ कहानी दे मुझे/1/
सांस लेना ही नही हैं जिंदगी
जीने खातिर बदगुमानी दे मुझे/2/
बढ़ गया कद हसरतों का अब बहुत
मुख्तसर सी जिंदगानी दे मुझे/3/
अब तलक गुजरी है रस्मन तौर पर
दर्द की अब मेजबानी दे मुझे/4/
हर कदम पर मुंतजिर है मुश्किलें
जिंदगी आंखों में पानी दे मुझे/5/
अख्तियारी दे कुछ अपने आप पर
इतनी तो अब मेहरबानी दे मुझे /6/
मेरी बस्ती हिंदू-मुस्लिम है बहुत
दिल खुदा हिंदुस्तानी दे मुझे/7/
No comments:
Post a Comment