2122 2122 212
मौन है कंगूरे चुप मीनार है
खौफ़ अज़ानो घंटियों में यार है/1/
है बड़ी दहशत में ही आबोहवा
इक वबा ने कर दिया लाचार है/2/
मर चुके हैं लोग जिंदा जिस्म है
शहर ये मुर्दों का इक बाजार है/3/
छ्प रही बस रेप हत्या की खबर
खून से लथपथ मिले अखबार हैं/4/
अब कतारें लग रही श्मशान में
क्या वहांँ पर भी कोई बाजार है/5/
लग रही चारागरों में बोलियाँ
क्या यही हाकिम तेरा व्यापार है/6/
बारूदों के ढेर में हैं हम खड़े
जो सुलगने हर समय तैयार है/7/
हो चुकी खामोश कब की जिंदगी
आदतन पर दिल धड़कता यार है/8/
भूलने का प्रश्न ही उठता नही
मेरे जीने का तू ही आधार है/9/
जिक्र खुद से कर दिया हमने तेरा
क्या कहें उस दिन से दिल बीमार है/10/
दूरियाँ मजबूरियाँ तन्हाईयाँ
इश्क के बस तीन ही हथियार है/11/
ताक पर है हर तमन्ना आजकल
जिंदगी से जिंदगी बेज़ार है/12/
आइये सब मिलके कुछ अच्छा करे
सहमा सहमा खौफ़ तर संसार है/13/
No comments:
Post a Comment