1222 1222 1222 1222
खयालो का जखीरा हूँ मगर जोकर नही हूँ मैं
मै रखता ताप हूँ लेकिन कोई अख्तर नही हूँ मैं/1/
कलम के जोर पर दुनिया जगाने वास्ते निकला
बड़ा ही चोट करता हूँ यूँ तो पत्थर नही हूँ मैं/2/
समेटे हूँ मैं भीतर खुद के तूफानी बवंडर इक
समंदर हूँ मैं गहरा आब चुल्लू भर नही हूँ मैं/3/
बदलना चाहता हूँ मैं जमाने को कलम के दम
खटकता हूँ मैं लोगों को भले खंजर नही हूँ मैं/4/
बड़ा लड़का हूँ मैं घर का बड़ी उम्मीद है मुझसे
अभी भी आस हूँ मैं खंडहर जर्जर नही हूँ मैं/5/
मिले जब ओहदों पर शोहदे अपमान है पद का
गलत कहता गलत को मौन रहता पर नही हूँ मैं/6/
लिखुँ अब और क्या कुछ भी समझ आता नही मेरे
बड़ी जद्दोजहद है चैन से पल भर नही हूँ मैं/7/
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