1222 1222 122
रवायत बस निभाया जा रहा है
ज़बर ही मुस्कुराया जा रहा है/1/
परिंदे आसमाँ मंडरा रहे हैं
दरख़्तों को हटाया जा रहा है/2/
महज दो चार दिन की जिंदगी है
शिकन माथे पे लाया जा रहा है/3/
खबर पल की नही कोई भी लेकिन
जहन में ख्वाब लाया जा रहा है /4/
अजब दस्तूर है दुनिया का देखो
जतन कल का बनाया जा रहा है/5/
जुबां पर रख जहर की पोटली को
हमी पे आजमाया जा रहा है/6/
गुजरता जा रहा मुझमें मुसलसल
मुझे मुझसे भुलाया जा रहा है/7/
बिखरने मैं लगा भीतर ही भीतर
मुझे कुछ यूँ मिटाया जा रहा है/8/
तनाबें बांध ली है जिंदगी की
समापन ओर जाया जा रहा है/9/
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