2122 1122 1122 22
रात दी है तो कभी कोई सहर भी देना
हौसला कम न हो बाजू में असर भी देना /1/
काफिया साथ रदीफ़ और बहर भी देना
दर्द को दर्द हो वो लफ्ज़ ए असर भी देना/2/
कुछ बुझी आंख की उम्मीद सहारा मै बनूं
रब मेरे मुझको चमकने का हुनर भी देना/3/
कुछ रूहानी से खयालात जहन में उतरे
इक ग़ज़ल ऐसी कहें इतना हुनर भी देना/4/
मेरे लफ्जों में जरा वज्न भी देना या रब
छू अगर पाऊँ दिलों को तो खबर भी देना/5/
मैं के फेरे में ही दुनिया तो है उलझी उलझी
मुझको अहसास जरा मैं के इतर भी देना /6/
आदमी यूँ तो नही दुनिया में तेरी कुछ कम
दरमियाँ भीड़ के तू पाक जिगर भी देना/7/
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