Wednesday, 12 May 2021

एसी कमरों से संचालित क्रांतिकारियों की यलगार

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ए सी  कमरों से  संचालित, क्रांतिकारियों की  यलगार, 
सुविधाओं  से उपजा  नारा, कैसे  करे दुश्मन  पर वार, /1/

कुंद पड़ चुकी आंदोलन की, आदत सत्ता रस कर पान, 
पीर  परायी  भूल  गए  तुम, भोग  विलासों  में   संग्राम,/2/

नंगा  नाच  रहे  हैं  लंपट,  चोर  उचक्के  और  बदमाश, 
जीत  का  जश्न  मना लाशों पर, छाया है  हर्षो उल्लास,/3/

मुर्दों  की  बस्ती  का  हाकिम,  है  वो  मुर्दों  का  सरदार, 
अंधा  भी है  बहरा  भी है,  सुनता न  कोई  चीख पुकार,/4/

लोकतंत्र की  परिभाषा ही, बदल  गयी है आज के दौर, 
जिसकी लाठी भैंस उसी की,चल है पड़ा अब ये ही तौर,/5/

तेरे  कल के  कारण  तुझको, ताज  मिला है  ले तू जान, 
रूप दिखा तू कल जैसा ही, रख सबके विश्वास का मान,/6/

निर्मम   हत्याओं पर   मौन,  प्रदर्शन   इक  कमजोरी है,
ये    नेतृत्व    नपुंसकता  है,     आडंबर    पुरजोरी    है,/7/

फर्क़  पड़ा  क्या  सांकेतिक, धरना प्रदर्शन करके बोल, 
कितने  घाव  लगाया  मरहम, कितने दर्द मिटाया तोल,/8/

मौन  रहे तो  दम  घुटता है, मुँह  खोले तो  जाती  जान, 
सच   लिखने से   यारी  टूटे,  चाटूकारी  से   जाए  मान,/9/

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