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ए सी कमरों से संचालित, क्रांतिकारियों की यलगार,
सुविधाओं से उपजा नारा, कैसे करे दुश्मन पर वार, /1/
कुंद पड़ चुकी आंदोलन की, आदत सत्ता रस कर पान,
पीर परायी भूल गए तुम, भोग विलासों में संग्राम,/2/
नंगा नाच रहे हैं लंपट, चोर उचक्के और बदमाश,
जीत का जश्न मना लाशों पर, छाया है हर्षो उल्लास,/3/
मुर्दों की बस्ती का हाकिम, है वो मुर्दों का सरदार,
अंधा भी है बहरा भी है, सुनता न कोई चीख पुकार,/4/
लोकतंत्र की परिभाषा ही, बदल गयी है आज के दौर,
जिसकी लाठी भैंस उसी की,चल है पड़ा अब ये ही तौर,/5/
तेरे कल के कारण तुझको, ताज मिला है ले तू जान,
रूप दिखा तू कल जैसा ही, रख सबके विश्वास का मान,/6/
निर्मम हत्याओं पर मौन, प्रदर्शन इक कमजोरी है,
ये नेतृत्व नपुंसकता है, आडंबर पुरजोरी है,/7/
फर्क़ पड़ा क्या सांकेतिक, धरना प्रदर्शन करके बोल,
कितने घाव लगाया मरहम, कितने दर्द मिटाया तोल,/8/
मौन रहे तो दम घुटता है, मुँह खोले तो जाती जान,
सच लिखने से यारी टूटे, चाटूकारी से जाए मान,/9/
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