2122 1122 1122 22
वक़्त बे वक़्त यूँ ही प्यार जता जाती है
चूम कर माथा मेरा लाड़ लड़ा जाती है/1/
जाग जाती है अचानक जो कभी रातों में
सर मेरा धीरे से सहला के सुला जाती है /2/
माँ ने रिश्तो को अकेला कभी होने न दिया
ख्वाब में आ के भी वो नेह लुटा जाती है/3/
क्यूँ करूँ सजदे इबादत क्यूँ जियारत करूँ
गर्दिशे वक़्त मेरे साथ दुआ जाती है/4/
माँ किसी एक दिवस की नही मोहताज कोई
माँ ही जीने का सबक पहला सिखा जाती है/5/
माँ ने रिश्तों को निभाया है बड़ी शिद्दत से
सारे तकरार सरलता से भुला जाती है/6/
माँ को बाहर न कभी जाते हुए देखा मगर
दुनिया दारी की सभी बातें बता जाती है/7/
माँ के हाथों का वो जादू कहीं मिलता ही नही
बासी रोटी जो चुपड़ सुब्ह खिला जाती है /8/
डांट गलती पे लगा जाती है गुस्सा होकर
तो कभी प्रेम से लोरी भी सुना जाती है /9/
खींच कर पांच लकीरें गढ़ा इक लफ्ज़ है माँ
उसके कदमों तले जन्नत की सदा जाती है /10/
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