Wednesday, 12 May 2021

वक़्त बे वक़्त यूँ ही प्यार जता जाती है

2122 1122 1122 22 
वक़्त  बे  वक़्त   यूँ  ही  प्यार  जता जाती है 
चूम  कर    माथा  मेरा   लाड़ लड़ा  जाती है/1/

जाग   जाती  है  अचानक  जो कभी रातों में
सर   मेरा   धीरे  से  सहला के सुला जाती है /2/

माँ ने  रिश्तो को  अकेला कभी  होने न दिया
ख्वाब में   आ  के  भी  वो  नेह लुटा जाती है/3/

क्यूँ करूँ  सजदे  इबादत  क्यूँ जियारत करूँ
गर्दिशे  वक़्त     मेरे  साथ    दुआ   जाती है/4/

माँ किसी एक दिवस की नही मोहताज कोई
माँ ही जीने का सबक पहला सिखा जाती है/5/

माँ ने  रिश्तों को  निभाया है  बड़ी  शिद्दत से
सारे   तकरार   सरलता  से   भुला   जाती है/6/

माँ को  बाहर  न  कभी जाते हुए देखा मगर 
दुनिया दारी  की   सभी  बातें  बता  जाती है/7/

माँ के हाथों का वो जादू कहीं मिलता ही नही
बासी  रोटी  जो  चुपड़  सुब्ह खिला जाती है /8/

डांट  गलती  पे  लगा  जाती है  गुस्सा होकर
तो  कभी  प्रेम  से   लोरी  भी  सुना  जाती है /9/

खींच कर पांच लकीरें गढ़ा इक लफ्ज़ है माँ
उसके  कदमों  तले  जन्नत की सदा जाती है /10/

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