2122 1122 1122 22
क्या गिला तुझसे करें जिंदगी तू पत्थर है
तू है गुस्ताख बहुत दूर से ही सुंदर है/1/
भाग्य जब साथ न दे तो ये समझ लेना तुम
कर्म ही पार लगाएगा ये भव सागर है/2/
क्या बुरा इससे जियादा भी कोई देखेगा
हमने देखा है कि हम खुद से ही खुद बाहर है/3/
रंजो गम रोज सुनाने को चली आती है
जिंदगी ख्वाब में भी अब तू मिले दूभर है/4/
अश्क सुखने भी न पाते हैं अभी आंखों से
फिर चले आते नये सोग भरे मंजर है/5/
रात के जुगनू बचा कर के जरा रख लो तुम
वक़्त के पास अंधेरों का बड़ा लश्कर है/6/
यूँ न मजबूर करो हँसने को हर पल मुझको
मैं हूँ जिंदा यही बस बात बहुत बेहतर है/7/
इतना पानी तो बचा कर ही रखो आंखों में
रोज अखबार में आती है खबर महशर है/8/
अब तो गंगा ने भी इंकार किया धोने से
हर ही इंसान के सर पाप भरा गट्ठर है/9/
इक खबर से न जियादा है कोई हस्ती तेरी
ऐ बशर बस तू सियासत के लिए नंबर है/10/
No comments:
Post a Comment