Wednesday, 12 May 2021

क्या गिला तुझसे करें जिंदगी तू पत्थर है

2122 1122 1122 22 
क्या  गिला  तुझसे  करें   जिंदगी  तू पत्थर है
तू  है  गुस्ताख   बहुत   दूर  से    ही   सुंदर है/1/

भाग्य  जब  साथ न दे  तो ये समझ लेना तुम
कर्म  ही   पार    लगाएगा    ये  भव सागर है/2/

क्या  बुरा   इससे  जियादा  भी  कोई  देखेगा
हमने देखा है कि हम खुद से ही खुद बाहर है/3/

रंजो गम   रोज   सुनाने  को   चली  आती है
जिंदगी  ख्वाब  में  भी  अब  तू मिले दूभर है/4/

अश्क  सुखने  भी न  पाते हैं अभी आंखों से
फिर   चले  आते    नये   सोग  भरे  मंजर है/5/

रात के  जुगनू  बचा कर के जरा रख लो तुम
वक़्त के  पास   अंधेरों  का   बड़ा  लश्कर है/6/

यूँ  न मजबूर करो हँसने को हर पल मुझको
मैं  हूँ  जिंदा  यही  बस  बात बहुत बेहतर है/7/

इतना  पानी  तो बचा कर ही रखो आंखों में
रोज  अखबार  में  आती है  खबर महशर है/8/

अब  तो  गंगा  ने भी   इंकार  किया धोने से
हर  ही  इंसान  के  सर   पाप  भरा  गट्ठर है/9/

इक खबर से न जियादा  है कोई हस्ती तेरी
ऐ बशर  बस  तू  सियासत के लिए नंबर है/10/

No comments:

Post a Comment