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तश्तरी में परोसी न मिलती सनम
कद्र कर लो जरा जिंदगी की सनम/1/
काम ऐसा करो हो किसी का भला
उम्र गुजरे मलंगों सरीखी सनम/2/
तू न उतरा खरा आजमाया बहुत
अब करें क्या भला आस कोई सनम/3/
कैद अपने दियों में मिले सब यहाँ
चाह सूरज नही है किसी की सनम/4/
गम के बादल छटे ना छटे जीस्त से
फिर भी नाराजगी तो रहेगी सनम/5/
चार कांधे भी मुश्किल से मिलते हैं अब
क्या सुनाए व्यथा बेहिसी की सनम/6/
कागजों पर दिखी हैं बड़ी राहतें
पर हकीकत नही ठीक कुछ भी सनम/7/
कायदे में रहें फायदे में रहे
है न अच्छी सदा होशियारी सनम/8/
साथ देना तेरा इक बड़ी भूल थी
हो न तुझसे सकी पासबानी सनम/9/
चांद तारों की बातें हुई खत्म तो
अब निभा लो जरा दुनिया दारी सनम/10/
रात ही है भरम दिन का पालो न तुम
रंग बदला है बाकी है वो ही सनम/11/
लोग मरने की ही करते बस हैं दुआ
हाल में जैसे हमने गुजारी सनम/12/
कौन मर्जी से अपनी फिरे है यहाँ
करती हैं दर ब दर जिम्मेदारी सनम/13/
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