Wednesday, 12 May 2021

तश्तरी में परोसी न मिलती सनम

212 212 212 212 
तश्तरी  में   परोसी    न   मिलती  सनम
कद्र  कर  लो   जरा  जिंदगी  की सनम/1/

काम  ऐसा  करो   हो  किसी  का  भला
उम्र   गुजरे     मलंगों    सरीखी   सनम/2/

तू  न   उतरा   खरा   आजमाया   बहुत
अब  करें  क्या  भला  आस कोई सनम/3/

कैद   अपने  दियों  में   मिले  सब यहाँ
चाह  सूरज  नही  है   किसी  की सनम/4/

गम  के  बादल  छटे  ना  छटे जीस्त से
फिर  भी   नाराजगी   तो   रहेगी सनम/5/

चार कांधे भी मुश्किल से मिलते हैं अब
क्या  सुनाए  व्यथा  बेहिसी  की  सनम/6/

कागजों   पर   दिखी   हैं   बड़ी  राहतें
पर हकीकत  नही ठीक कुछ भी सनम/7/

कायदे     में   रहें     फायदे     में   रहे
है  न  अच्छी   सदा   होशियारी  सनम/8/

साथ   देना   तेरा   इक  बड़ी  भूल थी
हो  न  तुझसे   सकी  पासबानी  सनम/9/

चांद  तारों   की  बातें   हुई   खत्म  तो
अब निभा लो जरा  दुनिया दारी सनम/10/

रात  ही है  भरम दिन का पालो न तुम
रंग  बदला  है  बाकी  है  वो  ही सनम/11/

लोग  मरने  की  ही करते बस हैं दुआ
हाल  में   जैसे    हमने  गुजारी  सनम/12/

कौन  मर्जी  से  अपनी  फिरे  है  यहाँ 
करती  हैं  दर ब दर  जिम्मेदारी सनम/13/

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