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सवालों को छिपाया जा रहा है
बवालों को दबाया जा रहा है/1/
असल मुद्दों से भटका कर तमाशा
नया हर दिन दिखाया जा रहा है/2/
हमीं से लूट कर गाढ़ी कमाई
मजा जम कर उड़ाया जा रहा है/3/
बुझी आंखों में झूठे ख्वाब देकर
हमे बस बरगलाया जा रहा है/4/
सियासत पर लगे सब दाग धब्बे
दिलासों से धुलाया जा रहा है/5/
बता जमहूरियत का हमको मालिक
हुकूम हम पर चलाया जा रहा है/6/
थमाकर झुनझुना आश्वासनों का
हमें पागल बनाया जा रहा है/7/
कोई अधिकार हक हमको नही है
हमे उल्लू बनाया जा रहा है/8/
करा इक बार बस मतदान हमसे
हमें सपना दिखाया जा रहा है/9/
हमारे फर्ज बतला कर बखूबी
अमल हमसे कराया जा रहा है/10/
चला हम पर ही लाठी कायदों की
हमें जीना सिखाया जा रहा है/11/
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