Wednesday, 12 May 2021

इस जहां में मुहब्बत बची है कहाँ

212 212 212 212 
इस  जहाँ  में     मुहब्बत     बची  है  कहाँ
कौन  करता  है   मतलब  बिना  कुछ यहाँ 
किसको कहते हैं इक चलती फिरती अजाँ... 
कोई   पूछे  तो   बस   याद  आती  है  माँ... 

एक   अहसास  है          एक   विश्वास है
दूर  है      पास  है      वो  मगर   खास है
जिसके  कदमों  तले   है    जमीं  आसमाँ...
कोई  पूछे  तो    बस    याद   आती है माँ... 

मर्म को  जिसने  सिखलाया  है मर्म  क्या
पूछे  ईश्वर   जिसे  आ  के    है  धर्म क्या
जिसने दुनिया को सिखलाई पहली जबाँ...
कोई  पूछे  तो  बस    याद  आती  है  माँ... 

नेमतें    फूल    बरसाती    पथ  पर   मेरे 
हौसले       मुस्कुराते   हैं     अक्सर  मेरे 
देखकर   मुश्किलों   की    ये  मजबूरियाँ...
कोई  पूछे  तो    बस    याद  आती है माँ... 

झूठ  भी  जिसके  पहलू  में  सच्चा हुआ
हर  बुरा  जिसको  छू करके अच्छा हुआ
जिसकी   गोदी  में   खेले  है दोनो  जहाँ ...
कोई  पूछे  तो   बस   याद    आती है माँ...

बांध   सकता   भला   कौन  है  शब्द  में 
उसके  उपकार  से   सब   ही  हैं कर्ज़ में 
उसके  जैसा   कहाँ    कौन  है   मेहरबाँ...
कोई  पूछे  तो   बस   याद   आती है माँ...

सारे   रिश्ते      सजे   थे      सभागार में
पर थे  हल्के  बहुत  सब ही  व्यवहार में
सब  पे  भारी  पड़ी  माँ  की ही  लोरियाँ... 
कोई  पूछे  तो   बस   याद  आती  है माँ...

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