212 212 212 212
क्या हुआ अब तलक ये भुला दीजिए
मत दिली दूरियों को हवा दीजिए/1/
छोड़िए मन मुटावों की बातें सभी
प्रेम का एक दीपक जला दीजिए/2/
रोशनी की है दरकार बेहद उन्हें
एक सूरज वहाँ पर उगा दीजिए/3/
यूँ अंधेरों में कब तक गुजारा करूँ
कुछ उजाला हो घर ही जला दीजिए/4/
नफरतें अब हटा दीजिए मन से सब
भूलने वाली शय है भुला दीजिए/5/
बेबसी सिसकियाँ बस दिखी हर तरफ
अच्छे दिन के भरम अब मिटा दीजिए/6/
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