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अब हादसों की जद से कोई भी बचा नही
जब हादसा न हो कभी वो दिन हुआ नही/1/
अब तो निकलते सुब्ह सिहरता है जी बहुत
गर दिन ढले तलक भी वो घर लौटता नही/2/
अफसोस नाक वाकिया कोई नया न अब
ये हादसा क्या पहले कभी भी हुआ नही/3/
पहले भी बेटियों का बुरा हश्र देखा है
पर इतना क्रूर पहले कभी कोई था नही/4/
लाखो हुए हैं जुल्म न इतना बड़ा हुआ
शर्मिंदगी की हद से गुजरना हुआ नही/5/
गिद्धों ने नोच डाला है मासूम इक बदन
जिंदा कहाने वालों से कुछ भी हुआ नही/6/
हसरत थी कल ये उनसे मुलाकात हो कभी
अब दिल ये उनसे सामना ही चाहता नहीं/7/
वो कत्ल कर रहे हैं निगाहों से बारहा
मुंसिफ को तो सबूत कोई भी मिला नही/8/
ऐसा नही कि अब कोई चाहत नही रही
बस देखने की हद से उसे देखता नही/9/
अब भी खयाल ख्वाब में उसका ही दख्ल है
पर आस उसको पाने की मैं पालता नही/10/
उम्मीद का दिया भी फकत फड़फड़ा रहा
चारो तरफ की है हवा पर वो बुझा नही/11/
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