Wednesday, 18 August 2021

दिल तो बहुत मिले हैं वो दिलबर नही मिले

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दिल तो बहुत मिले हैं वो दिलबर नही मिले 
आंखो  को  चाहतों के ही  मंजर  नही मिले/1/

दोजख  के  रास्ते  तो  दिखाते हैं  सब मगर
जन्नत  की  ओर  जाने को रहबर नही मिले/2/

यूँ  तो   मकां  बहुत  है   तेरे  शहर में  मगर 
लायक  हमारे   कोई  कहीं  घर  नही  मिले/3/

हमदम  जहाँ में हमको भी प्यारे मिले बहुत 
दम तक  निभाए साथ वो सहचर नही मिले/4/

फुटपाथ पर भी  होती बसर जिंदगी है कुछ
हाकिम   नुमाइंदे   कभी   बेघर  नही  मिले/5/

पत्थर  पे   जान  फूंकते    देखीं   अकीदतें
हम  दर ब दर  हैं  ढूंढते  पर दर  नही मिले/6/

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