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दिल तो बहुत मिले हैं वो दिलबर नही मिले
आंखो को चाहतों के ही मंजर नही मिले/1/
दोजख के रास्ते तो दिखाते हैं सब मगर
जन्नत की ओर जाने को रहबर नही मिले/2/
यूँ तो मकां बहुत है तेरे शहर में मगर
लायक हमारे कोई कहीं घर नही मिले/3/
हमदम जहाँ में हमको भी प्यारे मिले बहुत
दम तक निभाए साथ वो सहचर नही मिले/4/
फुटपाथ पर भी होती बसर जिंदगी है कुछ
हाकिम नुमाइंदे कभी बेघर नही मिले/5/
पत्थर पे जान फूंकते देखीं अकीदतें
हम दर ब दर हैं ढूंढते पर दर नही मिले/6/
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