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फुर्सत के लम्हें यार भी दो चार देखना
जी चाहता है फिर वो ही इतवार देखना/1/
तन्हा न कट सकेंगे सफर जिंदगी के ये
ख्वाहिश है साथ कोई भी गमख्वार देखना/2/
सहमे हुए हैं लोग वबा के खयाल से
चाहत न अब किसी की है चीत्कार देखना/3/
ठहरा हुआ है वक़्त अजीबो-गरीब सा
हलचल जरा सी होने दो फिर यार देखना/4/
कोशिश में रह गयी है यकीनन कमी कोई
रिश्तों में अब लगाव का आधार देखना/5/
दी जा रही है उसको जो भर भर के गालियाँ
किरदार खामियों में महकदार देखना/6/
तस्वीर पेश आपने की है जो मुल्क की
फित्ने फसाद लूट बलात्कार देखना/7/
हैरान बैठे वक़्त का धागा लिए हुए
भारी हुआ है आजकल संसार देखना/8/
दोनों तरफ है आग बराबर लगी हुई
जाहिल के दरमियाँ कोई होशियार देखना/9/
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