1222 1222 1222 1222
मुहब्बत बांटते है हर तरफ ईमान रखते हैं
लबों पर हर घड़ी हम मुल्क का यशगान रखते हैं/1/
न नफरत की कोई भी बात ही हम भूलकर करते
जिगर दिल जान में अपने हम हिंदूस्तान रखते हैं/2/
कहीं गिरजा कहीं मस्जिद कहीं देखो शिवाला है
है मिट्टी का असर सबका ही हम सम्मान रखते हैं/3/
हजारों रंग हैं इसके अलग तहज़ीब भाषा है
कभी क्रिसमस कभी होली कभी रमज़ान रखते हैं/4/
करे जो बद नजर दुश्मन निगाहें नोंच लें उसकी
विपत्ति के समय इक जूटता का ध्यान रखते हैं/5/
हुए इस सरजमीं कुर्बान लाखों ही सिकंदर हैं
सभी से खास हम अपनी अलग पहचान रखते हैं/6/
सलीके से सजाया है लहू देकर वतन अपना
वतन की राह में खुद को सदा कुर्बान रखते हैं/7/
तिरंगा गर्व है मेरा तिरंगा जान है मेरी
झुकाते शीश इसके सामने हम मान रखते हैं/8/
तमन्ना है यही बस मुल्क के कुछ काम आ जाएं
वतन के वास्ते मर मिटने का अरमान रखते हैं/9/
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