Wednesday, 18 August 2021

मुहब्बत बांटते है हर तरफ ईमान रखते हैं

1222 1222 1222 1222 
मुहब्बत  बांटते  है     हर  तरफ    ईमान  रखते हैं
लबों  पर  हर घड़ी हम मुल्क का यशगान रखते हैं/1/

न नफरत की कोई भी बात  ही हम भूलकर करते
जिगर  दिल जान में अपने हम हिंदूस्तान रखते हैं/2/

कहीं गिरजा  कहीं मस्जिद  कहीं देखो शिवाला है
है  मिट्टी का असर सबका ही हम सम्मान  रखते हैं/3/

हजारों  रंग हैं   इसके   अलग   तहज़ीब  भाषा है
कभी क्रिसमस कभी होली कभी रमज़ान रखते हैं/4/

करे  जो  बद नजर दुश्मन निगाहें नोंच लें उसकी
विपत्ति  के  समय  इक जूटता का ध्यान रखते हैं/5/

हुए  इस  सरजमीं  कुर्बान  लाखों  ही सिकंदर हैं
सभी से खास हम अपनी अलग पहचान रखते हैं/6/

सलीके  से  सजाया है  लहू  देकर  वतन अपना
वतन की  राह में  खुद  को  सदा कुर्बान रखते हैं/7/

तिरंगा     गर्व  है  मेरा     तिरंगा    जान  है  मेरी
झुकाते  शीश  इसके  सामने  हम  मान रखते हैं/8/

तमन्ना है यही बस मुल्क के कुछ काम आ जाएं 
वतन के  वास्ते  मर  मिटने का अरमान रखते हैं/9/

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