212 1212 1212 1212
खार खार हर तरफ है क्या करें गुलाब का
चल रहा है दौर नफरतों का और इताब का/1/
मुश्किलों के दौर चल रही सियासतें यहाँ
वक़्त ये नही है कोई गुजरे अहतिसाब का/2/
क्या मिला है बोलिए तो किसको दिल खरास से
मन खराब ही है हासिली दिले खराब का/3/
मिल के करना होगा सामना वबा की मार का
तब ही मिट सकेगा मुल्क से वजूद अज़ाब का/4/
क्या हुआ बदल गया जो वक़्त के हिसाब वो
खुल के आखिर आ गया जो मन में था जनाब का/5/
फिर रहे हैं ओढ़ कर नकाब लोग चेहरे पर
मोल बढ़ गया बहुत है आजकल नकाब का/6/
शहर में हैं अजनबी से अपने भी कुछ आशना
क्या मगर ही फायदा है उनके दस्तियाब का/7/
मानते तो हैं मगर मानते भी कुछ नही
क्या भला है तुक कहो ऐसे इंतिखाब का/8/
राह ताकते गुजर गयी उमर निगाह की
और अब न होगा इंतजार माहताब का/9/
ख्वाहिशें सुलग सुलग के खाक हो रही यहाँ
पर गुरूर है कि कम न होता है जनाब का/10/
है जहाँ जरूरतें वहीं कभी उगा नही
काम गर न आए करना क्या है आफताब का/11/
इताब - गुस्सा
अहतिसाब-लेखा जोखा
अज़ाब - दुख कष्ट
आशना - परिचित
दस्तियाब - उपलब्धता
इंतिखाब - स्वीकार
माहताब - चांद
आफताब - सूरज
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