2122 2122 2122 212
आरज़ू उम्मीद हसरत हैं रवायत के खिलाफ
और रही नीयत सदा दिल की शिकायत के खिलाफ/1/
कशमकश जद्दोजहद में ही गुजर होती रही
क्या कहें क्या क्या किया हमने है चाहत के खिलाफ/2/
धूप खिसकी हो गया साया इधर का भी उधर
इक भरोसा है बड़ी राहत मुसीबत के खिलाफ/3/
जिंदगी बदरंग करती है थकावट रंजो गम
एक पक्का रंग उदासी भी है रंगत के खिलाफ/4/
हर सितम बर्दाश्त उल्फत ने किया है इश्क में
पर उपेक्षा सह नही पाया मुहब्बत के खिलाफ/5/
खीच कर तस्वीर लम्हों की सजा कर फ्रेम में
हमने भी रक्खे हैं कुछ धोखे हकीकत के खिलाफ/6/
मेरे घर के दीये से रोशन तेरा घर बार हो
चल करें शुरूआत ऐसी कोई नफरत के खिलाफ/7/
आंख से आंसू सिकन माथे से चेहरे से गिला
ले गया सब यार यारी दे अदावत के खिलाफ/8/
हिन्दू मुस्लिम के इतर भी सोच को रखकर मियां
कुछ नया करके दिखाते हैं न आदत के खिलाफ/9/
फूल खिलते देख दिल में है जगी उम्मीद सी
है अभी बाकी बहारें बद नजारत के खिलाफ/10/
बस जरा ऊंचा उठा हम ऐंड़ियाँ दो पग चले
सर उठाना तो नही है ये हुकुमत के खिलाफ/11/
देख बेतरतीब सिस्टम बेबसी लाचारगी
है बहुत आक्रोश सीने में सियासत के खिलाफ/12/
सुनते हैं ऊंचा बहुत सुनने लगा है हुक्मराँ
शोर कुछ जमकर मचाओ इस जहालत के खिलाफ/13/
चाह दिल की है सदा मासूमियत कायम रहे
जिंदगी लेकिन रही अक्सर तबीयत के खिलाफ/14/
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