22 22 22 22 22 2
जात धरम ना यार की चिंता करते हैं
ना अपने परिवार की चिंता करते हैं /1/
कुछ ऐसे भी शख्स मिले जो शिद्दत से
बस अपने किरदार की चिंता करते हैं/2/
हम दौरे हालात की फिक्र में डूबे हैं
वो जाने किस हार की चिंता करते हैं/3/
झेल चुके हैं पिछले बरस लकडाउन जो
अब वो बस बाजार की चिंता करते हैं/4/
घर पर सब मसरूफ़ हुए मोबाइल में
बूढ़े बस अखबार की चिंता करते हैं/5/
रात के आगे रात बड़ी इक लम्बी है
हम तो बस भिनसार की चिंता करते हैं/6/
तमगों से ही पेट नही भरता यारों
जीने को आहार की चिंता करते हैं/7/
सूरज के उस पार अंधेरा होता है
लेकिन सब उजियार की चिंता करते हैं/8/
उम्मीदों से ही उम्मीदें रहती है
उम्मीदों के हार की चिंता करते हैं/9/
मृगतृष्णा के पीछे भागे फिरते हैं
मायावी संसार की चिंता करते हैं/10/
सारे रावण घर के भीतर से निकले
हम बाहर से वार की चिंता करते हैं/11/
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