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दिन ये नही सफेद कोई रात ही तो है
राहत सुकून चैन की बस बात ही तो है/1/
हल्का बहुत हुआ है ये बादल बरस के आज
हक है बरसने का उसे बरसात ही तो है/2/
क्या क्या न खेल रोज़ दिखाती है जिंदगी
अब क्या हो कोई रंज ये हालात तो है/3/
तूफ़ान से जो बच गये मर भूख से गये
सिस्टम की या नसीब की सौगात ही तो है/4/
क्यूँ नाम सुन के भीड़ ने रस्ता बदल लिया
पहले तो आदमी है वो फिर जात ही तो है/5/
किरदार जीते जीते मैं खुद से हुआ हूँ दूर
खुद के वजूद वास्ते आघात ही तो है/6/
रहता है कोई और भी मुझमें मेरे सिवा
दीवानगी की ये भी शुरूआत ही तो है/7/
जाने टपक पड़े हैं किधर से ये खामखां
अब आ गये तो रहने दो जज्बात ही तो है/8/
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