1212 1122 1212 22
हमारे "गाँव" में तो "खुशबुओं" का मौसम है
खिली खिली है सुब्ह तितलियों का मौसम है
कि लहलहाते हुए खेत झरने अल्हड़पन
फुदकती चहचहाती चिड़ियों मौसम है
ये नन्हे हाथों में कंचे ये गिल्लियाँ डंडे
है खिलखिलाती डगर मस्तियों का मौसम है
तुम्हारे शहर में जंगल है ईट गारों का
अभी भी गांव में कच्चे घरों का मौसम है
जरा सी बूंद पड़ी और महक उठी मिट्टी
बरस गरज रहे अब बादलों का मौसम है
जरा सी धुप की दरकार है इन आंखों को
बहुत दिनों से यहां बारिशों का मौसम है
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