1222 1222 1222 1222
कि मुश्किल वक़्त को मुश्किल बताना भूल जाते हैं
जो खुद से मिलते हैं हम तो जमाना भूल जाते हैं/1/
उन्ही से पूछते हैं वज्ह उनके रूठने की हम
सितमगर जब कभी हमको सताना भूल जाते हैं/2/
है उलझी इस कदर जद्दोजहद में जिंदगी अपनी
कि रोते हैं तो आंसू ही बहाना भूल जाते हैं/3/
कुछ उधड़े उधड़े दिखते हैं हमे रिश्तों के धागे सब
कभी पैबंद इनमें जब लगाना भूल जाते हैं/4/
कि जिनके वास्ते ख्वाहिश सब अपनी दफ्न की हमने
वो बच्चे फर्ज अब अपने निभाना भूल जाते हैं/5/
नये मिल जाते हैं हर मोड़ पर अब दर्द भी अक्सर
नये से मिल के हम भी गम पुराना भूल जाते हैं/6/
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