212 212 212 212
कुछ व्यथा देख मुँह मत फिराया करो
सामना खुद को सच से कराया करो/1/
दिख रहा बस वही तो हकीकत नही
निचली बस्ती कभी झाँक आया करो/2/
हो रही है बसर जैसे तैसे जहाँ
कुछ नजर से नजर भी मिलाया करो/3/
है पशेमां जहाँ खुद पे ही जिंदगी
जिंदगी से वहाँ मिलने जाया करो/4/
भूख और बेबसी से न उबरे कभी
ख्वाब झूठे उन्हें मत दिखाया करो/5/
धूप देखा जिन्होंने न अरसा हुआ
ऐसी बस्ती में सूरज उगाया करो/6/
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