Wednesday, 18 August 2021

कुछ व्यथा देख मुँह मत फिराया करो

212 212 212 212
कुछ व्यथा देख मुँह मत फिराया करो
सामना  खुद को  सच से कराया करो/1/

दिख रहा  बस वही  तो हकीकत नही
निचली बस्ती  कभी झाँक आया करो/2/

हो  रही  है   बसर    जैसे  तैसे   जहाँ
कुछ नजर से  नजर भी मिलाया करो/3/

है  पशेमां  जहाँ  खुद  पे  ही  जिंदगी
जिंदगी से   वहाँ  मिलने  जाया  करो/4/

भूख  और  बेबसी  से  न  उबरे कभी
ख्वाब  झूठे  उन्हें  मत  दिखाया करो/5/

धूप  देखा  जिन्होंने  न  अरसा  हुआ
ऐसी  बस्ती  में   सूरज  उगाया  करो/6/

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