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अदाओं के दम पे नातेदारी नही चलेगी
मिलो तो दिल से ये इश्तेहारी नही चलेगी/1/
निभा सको साथ जिंदगी भर तभी तो चलना
फिर आधे रस्ते में होशियारी नही चलेगी/2/
कभी सुहाने से ख्वाब आंखों में हम सजाएँ
इन आंसूओ की यूँ पहरेदारी नही चलेगी/3/
बुलंदियों पर तो ये तमाशा है रोज़ का ही
मगर जियादा ये फौजदारी नही चलेगी/4/
पहन के जूता नया बदल चाल ही गयी है
बता उसे जिंदगी उधारी नही चलेगी/5/
अगर पड़ोसी है सोया भूखा है तुमपे लानत
ये सारे खैरात रोजेदारी नही चलेगी/6/
जो दूसरों के लिए ही जीये वो जिंदगी है
बस अपने खातिर ये जाँ निसारी नही चलेगी/7/
यूँ टिमटिमाता रहा वो बिजली के दरमियाँ भी
कि कह रहा हो दिया तुम्हारी नही चलेगी/8/
लगे है मेहमान जैसे अब तो हमें ये खुशियाँ
दुखों की यूँ घर में दावेदारी नही चलेगी/9/
दो चार लफ्ज़ो में दिल की बातें कहें भी कैसे
यूँ बंदिशों की तो पेशकारी नही चलेगी/10/
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