Wednesday, 18 August 2021

वक़्त बन जाऊँ मैं बन जाए वो लम्हा मुझमें

2122 1122 1122 22 
वक़्त बन जाऊँ मैं  बन जाए वो  लम्हा मुझमें
मुझको मुझसे ही घटा दो तो बचा क्या मुझमें/1/

सब में सब कुछ तो न होता है बुरा ही अक्सर 
कुछ तो होगा ही  जरा सा कहीं अच्छा मुझमें/2/

भीग  जाती हैं   यकायक  ही  सुनी सी आंखें 
अब भी ज़िंदा है वो  बरसात का लम्हा मुझमें/3/

और है  बात   सुना   तुझको  गया  शिद्दत से 
वरना  सबको  ही  वहाँ पर था भरोसा मुझमें/4/

ख्वाहिशें  रोज़  जरूरत  से  उलझ  पड़तीं हैं 
रोज़  होता  है    नया  एक     तमाशा मुझमें/5/

चल रही जद्दोजहद खुद के ही भीतर खुद से 
कोई   मुझसे  भी   परेशान  है  रहता  मुझमें/6/

मुझको महसूस करो  खुशबूओं के जैसे करो
मैं  हूँ  खामोश    नही     शोर शराबा  मुझमें/7/

रफ्ता रफ्ता  है   बदलने  लगा  किरदार मेरा
रह  गया  है  वो  अभी  और  जरा सा मुझमें/8/

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