2122 1122 1122 22
वक़्त बन जाऊँ मैं बन जाए वो लम्हा मुझमें
मुझको मुझसे ही घटा दो तो बचा क्या मुझमें/1/
सब में सब कुछ तो न होता है बुरा ही अक्सर
कुछ तो होगा ही जरा सा कहीं अच्छा मुझमें/2/
भीग जाती हैं यकायक ही सुनी सी आंखें
अब भी ज़िंदा है वो बरसात का लम्हा मुझमें/3/
और है बात सुना तुझको गया शिद्दत से
वरना सबको ही वहाँ पर था भरोसा मुझमें/4/
ख्वाहिशें रोज़ जरूरत से उलझ पड़तीं हैं
रोज़ होता है नया एक तमाशा मुझमें/5/
चल रही जद्दोजहद खुद के ही भीतर खुद से
कोई मुझसे भी परेशान है रहता मुझमें/6/
मुझको महसूस करो खुशबूओं के जैसे करो
मैं हूँ खामोश नही शोर शराबा मुझमें/7/
रफ्ता रफ्ता है बदलने लगा किरदार मेरा
रह गया है वो अभी और जरा सा मुझमें/8/
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