Wednesday, 18 August 2021

उम्मीद हुई रोशन फिर यार अंधेरों में

221 1222 221 1222
उम्मीद   हुई   रोशन   फिर   यार   अंधेरों में
ये  मुल्क  हुआ  फिर  से  उजियार अंधेरों में/1/

मायूस   हताशा  के   घिरते   हुए  आलम में
फिर  आस  जगी दिल में इक बार अंधेरों में/2/

दिखते न उजालों में जो साफ कभी खुलकर
सब  सामने   आए  अब  किरदार  अंधेरों में/3/

इमदाद   जरा    करके   तस्वीर  हजारों ली
मुफलिस  को पशेमां मत कर यार अंधेरों में/4/

फिर  सुबह  नयी  होगी  उम्मीद यकीनन है
हर  शख़्स  है  इस  खातिर तैयार अंधेरों में/5/

कुछ   चुल्हे   पड़े   ठंडे  है   यार  गरीबी में
कोने  में    हैं  लोटे कुछ  बीमार   अंधेरों में/6/

उनको ही उजाले की  भी  सख्त जरूरत है
इक दीप  है  उस घर की  दरकार अंधेरों में/7/

दरकार  नही  कोई  लाखों की  हजारों की
इक दीप  से  होगा सब उजियार अंधेरों में/8/

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