221 1222 221 1222
उम्मीद हुई रोशन फिर यार अंधेरों में
ये मुल्क हुआ फिर से उजियार अंधेरों में/1/
मायूस हताशा के घिरते हुए आलम में
फिर आस जगी दिल में इक बार अंधेरों में/2/
दिखते न उजालों में जो साफ कभी खुलकर
सब सामने आए अब किरदार अंधेरों में/3/
इमदाद जरा करके तस्वीर हजारों ली
मुफलिस को पशेमां मत कर यार अंधेरों में/4/
फिर सुबह नयी होगी उम्मीद यकीनन है
हर शख़्स है इस खातिर तैयार अंधेरों में/5/
कुछ चुल्हे पड़े ठंडे है यार गरीबी में
कोने में हैं लोटे कुछ बीमार अंधेरों में/6/
उनको ही उजाले की भी सख्त जरूरत है
इक दीप है उस घर की दरकार अंधेरों में/7/
दरकार नही कोई लाखों की हजारों की
इक दीप से होगा सब उजियार अंधेरों में/8/
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