122 122 122 122
ये हर दिन का मसला नयी बात है क्या
शराफत में खतरा नयी बात है क्या/1/
यूँ शातिर बहुत आजकल हो गये हैं
मिले गर जो धोखा नयी बात है क्या/2/
जो कातिल हैं सारे तेरे शहर में फिर
कोई कत्ल होना नयी बात है क्या/3/
खबर मौत की अब रुलाती नही है
है बेहिस जमाना नयी बात है क्या/4/
मजे लो अगर ले सको जिंदगी से
यूँ तो जी उठाना नयी बात है क्या/5/
हँसी आती है देख कर अब उदासी
हो अपनी तरह का नयी बात है क्या/6/
मिले गूंगे बहरे ही हमको यहाँ सब
हो गर शहर मुर्दा नयी बात है क्या/7/
भरी इश्तेहारों से है जिंदगी ये
बने गर तमाशा नयी बात है क्या/8/
है भूखे की रोटी का चर्चा सदन में
तसल्ली दिलासा नयी बात है क्या/9/
ये मसला है जिसका वही बेखबर है
गजब है तमाशा नयी बात है क्या/10/
जरा सब्र रख जाएगा ही अंधेरा
सवेरा उजाला नयी बात है क्या/11/
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