212 212 212 212
राम के घर गया श्याम के दर गया
सब देवालय गया सारे मंदर गया/1/
पूज डाले सभी देवता धाम सब
पर न संताप मेरा कहीं पर गया/2/
अंतरात्मा ने फिर मुझको आवाज दी
मैकदे चल वहाँ जो गया तर गया/3/
हर कदम मौत का खेल है जिंदगी
क्या जियेगा भला शख्स जो डर गया/4/
शम्स के डूबते ही थकी सी लगी
रौनकें सांझ की सब वो लेकर गया/5/
अब वो मिल बैठकर रोना हँसना गया
ऐ वबा देख तू क्या कहर कर गया/6/
रह गयी फिर कसर कुछ कहन में मेरे
सब सुने तो मगर कुछ न भीतर गया/7/
जिंदगी की तरह ही ग़ज़ल है मेरी
कुछ समझ आते आते सुखनवर गया/8/
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