2122 2122 2122 212
गर नही कुछ और तो बातें चुभन तक ले चलो
भाषणों को राशनों के ही सदन तक ले चलो/1/
छोड़िए लफ्फाजियों का दौर अब जाता रहा
वायदों को अब हकीकत के छुअन तक ले चलो/2/
खूब महकाया बदन को इत्र के दम पर मियां
मुल्क के मिट्टी की खुश्बू भी बदन तक ले चलो/3/
लाल सरहद पर सलामत है बताने के लिए
एक झूठा खत कोई माँ के नयन तक ले चलो/4/
इस निराशा को हताशा को पतन की राह से
तंगहाली की व्यथा को अब रूदन तक ले चलो/5/
कोसना अब बंद भी कर दो मुकद्दर को सदा
हौसलों की बात को अपने बदन तक ले चलो/6/
अम्न का पैगाम ये दर दर से मन तक जाये तो
अब अंधेरों को उजालों के दहन तक ले चलो/7/
सजदे में मैं सर झुकाऊं आस्तानों में मियां
और तुम अपने वज़ू को आचमन तक ले चलो/8/
सदन - घर
दहन - छेद सुराख
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