2122 2122 2122 212
जिंदगी यूँ ही गुजर जाएगी बस रोते हुए
थक ही जाएंगी निगाहें ख्वाब बस ढोते हुए/1/
उलझनों से कब उबर पाया कोई भी आदमी
आरज़ू उम्मीद हसरत से घिरा होते हुए/2/
दूरियाँ मजबूरियाँ महरूमियाँ तन्हाईयाँ
ये मिली सौगात खुद को इश्क में खोते हुए/3/
कशमकश जद्दोजहद में उम्र गुजरी है सदा
मौज किस्मत ने किया है रात दिन सोते हुए/4/
चैन खोया नींद खोयी चंद ख्वाबों के लिए
अब लगी सांसे उखड़ने हौसला बोते हुए/5/
No comments:
Post a Comment