221 2122 221 2122
जद्दोजहद से हासिल जो जिंदगी मिलेगी
दुर्भावना विसर्जित सुलझी हुई मिलेगी/1/
उम्मीद का दिया इक मन में जलाए रखिये
तुमको कदम कदम पर ही रोशनी मिलेगी/2/
लहज़ा मिज़ाज में है रद्दोबदल जरूरी
उस पार जिंदगी फिर अच्छी भली मिलेगी/3/
मजबूरियाँ तसल्ली महरूमियाँ उदासी
मंडप में कहकहों के सिसकी दबी मिलेगी/4/
मत जिक्र भी करो तुम खुलकर के रंजो गम का
यूँ कुछ न कुछ यहाँ पर सबमें कमी मिलेगी/5/
मन बोलता है इससे है बे खबर सितमगर
बस काट कर जुबानें क्या खामुशी मिलेगी/6/
फिर लौट कर न आता है वक़्त जाने वाला
क्या सोचिए उसे जो वापस नही मिलेगी/7/
है हौसला जरूरी और जिद भी है जरूरी
जज्बा हो जीतने का मंजिल तभी मिलेगी/8/
मत आंकिए इसे कम ये आन है हमारी
जब भी पड़े जरूरत बेटी खड़ी मिलेगी/9/
सूरज निकलने वाला है सब्र रख जरा सा
जारी सफर रखेगा तो रोशनी मिलेगी/10/
No comments:
Post a Comment