Wednesday, 18 August 2021

तेरी पनाह में मेरे ये जिस्मो जान रहे

1212 1122 1212 22 
तेरी   पनाह  में   मेरे   ये  जिस्मों  जान  रहे
न  हो  जमीन   या   चाहे  न  आसमान  रहे/1/

न  इल्तिजा  न  गुजारिश  है  कोई और मेरी
बस  एक  तू  ही  खयालों में शब बिहान रहे/2/

जुदा  न  होना  कभी   चाहे  जो  सजा देना
सफर  के  वक्त  तू है  बस  ये इत्मीनान रहे/3/

तू   मेरे    पास    रहे    इसलिए    जरूरी है 
तमाम   उम्र  ही    चलता  ये  इम्तिहान  रहे/4/

कुछ और बात भले हो न हो किसी से कोई
मेरी  जुबां  पे   तेरा   हर  घड़ी  बखान  रहे/5/

हर  एक   कतरा   तेरा  नाम ही पुकारे बस 
अगरचे    जिस्म    सरापा    लहूलुहान  रहे/6/

     🙏🌹।।जय श्री श्याम।।🌹🙏

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