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दस्तूर मौके वक़्त सभी देख भाल कर
अपनी जबान खोलिये अब कुछ संभाल कर/1/
करते हैं घाव गहरे बिना धार के कटार
सब ओर इश्क घोलिए फुर्सत निकाल कर/2/
दुनिया में आज सब हैं बराबर डरे हुए
दरवेश जश्न कर रहे कासा उछाल कर/3/
हिम्मत से हौसलों से बनाया जो शह्र को
दर दर भटक रहा वो तेरा पेट पाल कर/4/
अपनी गरज में सर पे बिठाया गया उन्हें
मुश्किल में आज छोड़ दिया क्यूँ बेहाल कर/5/
मिलती है खूब जद्दोजहद मुश्किलो के बाद
जी ले तू जिन्दगी को जरा देख भाल कर/6/
कितनों को वो नसीब नही तुझको जो मिला
कर रब का शुक्रिया अदा अपने इस हाल पर/7/
देखो लगी है दांव पे हर एक जिंदगी
होते हैं सारे फैसले सिक्के उछाल कर/8/
फुर्सत निकाल कर कभी कुछ पल को सोचना
हासिल हुआ क्या बोलिए नफरत यूँ चाल कर /9/
दीवार दरमियाँ ही खड़ी एक हो गयी
बस फासले बढ़े हैं फकत यूँ बवाल कर/10/
कैसे मै तेरे हाथ धुलाऊँ बता मुझे
दामन में कल गया था तू कीचड़ जो डाल कर/11/
मंहगी घड़ी दे सबको यूँ मुश्किल घड़ी न दे
मजबूर जिंदगी में खुदा कुछ कमाल कर/12/
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