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कहाँ हैं मंजिलें मैं रास्ता हूँ
मैं अपनी धुन में ही बस चल रहा हूँ/1/
तमन्ना आरजू उम्मीद धोखा
मैं इन सबमें ही बस उलझा हुआ हूँ/2/
गुजर ही जाएगा ये वक़्त यूँ भी
इसे मैं राएगाँ ही सोचता हूँ/3/
समेटो और पढ़ लो मुझको जी भर
मैं कागज पर यूँ ही बिखरा पड़ा हूँ/4/
फिजूलखर्ची की लत ऐसी लगी है
मैं खुद को दर ब दर करता रहा हूँ/5/
यूँ तो हासिल हुआ कुछ भी नही पर
बिछड़ तुमसे मैं खुद खोने लगा हूँ/6/
कहाँ बदला तुम्हारे बाद भी कुछ
ये देखो अब तलक मैं जी रहा हूँ/7/
रसीदें हैं ये चेहरे पर लकीरें
मैं किस हद तक यहाँ खर्चा गया हूँ/8/
जरूरत के लिए हूँ दर ब दर मैं
तसल्ली चैन राहत ढूंढता हूँ/9/
कहीं है डर कहीं पर है भरोसा
कहा रब ने मैं सब कुछ देखता हूँ/10/
बना पाए न जो अपने मुताबिक
उन्ही के वास्ते मैं बस बुरा हूँ/11/
सभी हैं मस्त अपनी-अपनी धुन में
भरी महफ़िल में बस मैं गम जदा हूँ/12/
बिछड़ने का कभी सोचा नही था
बिछड़ कर अब तुझे बस सोचता हूँ/13/
न वो भी हँस सका मुझको रुला कर
यही मैं सोच कर अब हँस रहा हूँ/14/
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