Wednesday, 18 August 2021

क्या क्या न खेल रोज़ दिखायी ये सायकल

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क्या क्या  न खेल रोज़  दिखाती ये सायकल
पर   काम  मेरे   खूब   बनाती   ये  सायकल/1/

कितने   ही    रास्ते    नये    इसने दिखाए हैं 
हमदम  केे  जैसे  पेश  है  आती ये सायकल/2/

तन्हाईयों   के   दौर  का    मेरे    बनी गवाह
मुश्किल  घड़ी में  साथ निभाती ये सायकल/3/

फुर्सत में   दोनो  साथ   गुजारे   बहुत समय
मौके  पे   मेरा   मान   बढ़ाती   ये सायकल/4/

लम्बे  सफर  से   कोई   रहा  न  कभी गुरेज
मंजिल से मेरे   मुझको मिलाती ये सायकल/5/

बदले  समय  के  साथ बदल से गये हैं लोग
मुझको मगर है अब भी सुहाती ये सायकल/6/

फिटनिस  का  मेरे  खूब ही रक्खे खयाल है
कसरत  बिना  करे  ही  कराती ये सायकल/7/

भुलने  न  अपने  आप  को  देती  मुझे है ये 
मुझ तक मुझे ही रोज़ ले जाती है सायकल/8/

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