2122 1212 22
ख्वाब सिरहाने खास बैठे हैं
थोड़े गुमसुम निराश बैठे हैं/1/
अब इन्हें इंतखाब कैसे करूँ
घर में बच्चे उदास बैठे हैं/2/
दे रही हैं जरूरतें दस्तक
जेब खाली हताश बैठे हैं/3/
चूल्हा ठंडा पड़ा रसोई में
लोटा थाली गिलास बैठे हैं/4/
आपसी जंग चल रही है वहाँ
हम वहीं आस पास बैठे हैं/5/
आएंगे दिन जरूर अच्छे भी
हम लगाए कयास बैठे हैं/6/
आस कैसे मुहब्बतों की करें
सब यहाँ दिल खरास बैठे हैं/7/
अब न पहचानते किसी को कोई
यूँ तो सारे शनास बैठे हैं/8/
कैसे निकले उदासियों से अब
दूर बेहद उजास बैठे हैं/9/
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