2122 2122 2122 2122
थक गए हम जिंदगी तेरी शरारत लिखते लिखते
उम्र बीती सारी अपनी बस वसीयत लिखते लिखते /1/
अब बड़े होने लगे बच्चे तो घर छोटा लगा है
कम पड़े कागज भी अब तो हर जरूरत लिखते लिखते /2/
खत मे ही बस पूछ लेते हाल कैसा है तेरा अब
आते है आंखों में आंसू ऐसी ग़ुरबत लिखते लिखते /3/
मां की ममता बढती ही जाती है हर पल हर घड़ी बस
भूल औलादें ही जाती हैं अयादत लिखते लिखते/4/
बंद कर अब दास्ताँ दैरो हरम की हर घड़ी यूँ
हो गए कितने फना ऐसी इबारत लिखते लिखते/5/
एक अरसा हो गया गुजरे हमे उसकी गली से
याद फिर से आ गये हैं वो मुहब्बत लिखते लिखते/6/
उठ रही हैं उंगलियाँ हमपे जमाने भर से ही अब
हो गये हम भी परेशां से वज़ाहत लिखते लिखते/7/
सोच कर उनको चमक सी आ ही जाती चेहरे पर है
फिर मचल जाती है अक्सर ही तबीयत लिखते लिखते/8/
ग़ुरबत - विवशता परवशता
अयादत - रोगी का हाल पूछना
इबारत - लेख
वज़ाहत - बड़प्पन महानता
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