12122 12122
ये वक़्त जिससे दगा करेगा
वो क्या किसी का बुरा करेगा/1/
है सब मुकद्दर का खेल कहकर
बस अपने रस्ते चला करेगा/2/
अंधेरा है बस ये मुट्ठी भर ही
बुरा उजालों का क्या करेगा/3/
जरा सी किरणें ही देखकर शब
समेट खुद को चला करेगा/4/
उम्मीद कायम अभी है दिल में
जो कुछ करेगा भला करेगा/5/
बंधी है सबकी ही आस उसमें
कि सबका अच्छा खुदा करेगा/6/
मिटाए हैं जो दरख्त लाखों
कहो तो कैसे फला करेगा/7/
तरस रहे आज सांस खातिर
न सोचा कुदरत गिला करेगा/8/
इन हुक्मरानों ने कब सुनी है
यतीम लाचार सिसकियों की/9/
कराहता मन किसे पुकारे
जी किससे अब आसरा करेगा/10/
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