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उदासियाँ हर तरफ दिखी है
हर एक चेहरे पे ही गमी है/1/
है खौफ़ बरपा हुआ दिलों में
तसल्लियाँ जो है कागजी है/2
जिधर भी देखो है बस अंधेरा
हवा अजब सी ही चल पड़ी है/3/
पड़ा है बीमार सारा सिस्टम
सिसकती राहों पे जिंदगी है/4/
पड़ी जरूरत जो यार की तो
कहीं किसी का पता नही है/5/
बदल गया वक़्त जो जरा सा
नियत सभी की बदल गयी है/6/
हसीन सपने दिखा दिखा कर
छिपाई हाकिम ने हर कमी है/7/
बुझे हजारों घरों के दीपक
वो दे रहा मुफ्त रोशनी है/8/
न हारना खुद से बस कभी तुम
कोई समस्या बड़ी नही है/9/
छटेंगे बादल दिखेगा सूरज
अभी निगाहों में कुछ नमी है/10/
सवेरे का इंतजार कर बस
न उम्र ज्यादा ये रात की है/11/
बस अब तुम्ही हो मेरा सहारा
किसी से उम्मीद कुछ नही है /12/
प्रभू जी संजीवनी ले आओ
कि अब तो सांसे उखड़ रही है/13/
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