पाक दामन सारे किरदार ज्यूं ही हो जाए
जन्नतों से बड़ी जन्नत ये जमीं हो जाए
पलकें नीची ही रखो हाथ जो देने को उठे
सामने वाला पशेमां न कहीं हो जाए
ऐसे इमदाद करो खुद को न मालूम चले
लेने वाले को खुदाई पे यकीं हो जाए
दिल दुखाने की न कोशिश भी कभी करना तुम
तेरी हरकत से न आंखों में नमीं हो जाए
गर ये दुनिया को बदलना है तो खुद को बदलो
क्या खबर यूँ ही बुराई में कमी हो जाए
आज शिद्दत से रगड़ कर है गुसल हमने किया
अब यकीनन ही जरा साफ जबीं हो जाए
सो रहा भुखे पड़ोसी क्या सरोकार तुझे
कोई खुदगर्ज़ न इतना भी कहीं हो जाए
वक्त ने हमको पढ़ा है बड़ी शिद्दत से मियां
हम मजम्मत की गवाही न कहीं हो जाए
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