Thursday, 1 August 2019

अपने किरदार का कुछ भी तो पता रहने दे

2122 1122 1122 22
अपने किरदार का कुछ भी तो पता रहने दे
है जरा  दाग  जो   दामन में   लगा  रहने दें

हसरतों और तकाजों की वही जिद हरदम
फलसफा  है ये  अजीब और  हटा रहने दे

यूँ तमाशा है बहुत दिल का है उखडी सांसे
अब भी उम्मीद का जलता है दीया रहने दे

उलझने  ही है  बढ़ाते  ये फकत रिश्ते सब
रह गया  अब जो है बाकी  ये जरा रहने दे

हम चले जाएंगे महफिल से तेरी यूँ उठकर
करके  बेआबरू  हमको  न   उठा  रहने दे

टांग देता हूँ  हर इक  शाम  बदन  खूंटी पर
मेरी  दहलीज  का  मत  पुछ   पता रहने दे

बांध  दो  मेरे  खयालात  हो  जंजीरें  अगर
आरजूओं  को  न  यूँ   आप  खुला  रहने दे

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