1212 1122 1212 22
न ले तू हल्के में यूँ कर न दर किनार मुझे
समझ तू लोहे की मजबूत सी दीवार मुझे/1/
मै सरहदों में हूँ मुस्तैद रात दिन हर दम
अदब के साथ तू हिंन्दुस्ताँ पुकार मुझे/2/
ये अम्नो चैन वतन में मेरी बदौलत है
मगर नसीब हुई कब भला बहार मुझे/3/
निसार मुल्क की खिदमत में जिस्मों जाँ है मेरी
यूँ कहते सब हैं निगहबान पहरेदार मुझे/4/
इसी दहर ही मिले दिल अजीज मुझको सभी
कभी खुशी तो कभी गम मिले हजार मुझे/5/
यहीं पे हमने सभी धूप छांव देखे हैं
पता लगा है यहीं सहरा और बहार मुझे/6/
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