221 2122 221 2122
मिलती नही कहीं भी हैं मस्तियाँ ग़ज़ल में
देती सुनाई हैं बस अब सिसकियाँ ग़ज़ल में/1/
महरूमियाँ मशक्कत बेचारगी जरूरत
अब रह गईं यही बस हैं सुर्खियाँ ग़ज़ल में/2/
जद्दोजहद बहुत है यारों कदम कदम पर
कुछ ढूंढते हैं अब भी सरगोशियाँ ग़ज़ल में/3/
सबको ही एक दिन जब जाना खुदा के घर है
फिर क्यूँ भरें बताओ हम तल्ख़ियाँ ग़ज़ल में/4/
मुँह में जुबाँ नही है ना नब्ज़ है बदन में
मुर्दा कहाती ऐसी हर हस्तियाँ ग़ज़ल में/5/
गुलशन से ही नदारद जब हो गईं बहारें
लाऊँ कहाँ से बोलो तो तितलियाँ ग़ज़ल में/6/
होता अगर असर जो आहों में मुफलिसों के
बेहतर जरा सी होतीं दुश्वारियांँ ग़ज़ल में/7/
किस्मत से रोज़ अपनी इक जंग लड़ रहे हैं
इस वज्ह भी दिखी है कुछ सख्तियाँ ग़ज़ल में/8/
नफरत भरे जहाँ को दरकार है मुहब्बत
मत दिल दुखाने वाली दो अर्जियाँ ग़ज़ल में/9/
प्यासा बहुत है दिखता इस दौर का हर इंसा
बारिश करो मुहब्बत की अब मियांँ ग़ज़ल में/10/
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