Saturday, 23 July 2022

मिलती नही कहीं भी हैं मस्तियाँ ग़ज़ल में

221 2122 221 2122 
मिलती  नही  कहीं  भी  हैं   मस्तियाँ ग़ज़ल में
देती  सुनाई  हैं  बस  अब सिसकियाँ ग़ज़ल में/1/

महरूमियाँ    मशक्कत    बेचारगी     जरूरत
अब  रह  गईं  यही  बस  हैं  सुर्खियाँ ग़ज़ल में/2/

जद्दोजहद  बहुत है  यारों      कदम कदम पर 
कुछ  ढूंढते हैं  अब भी  सरगोशियाँ  ग़ज़ल में/3/

सबको ही एक दिन जब जाना खुदा के घर है
फिर क्यूँ भरें  बताओ  हम तल्ख़ियाँ ग़ज़ल में/4/

मुँह  में  जुबाँ  नही  है   ना  नब्ज़  है  बदन में
मुर्दा   कहाती   ऐसी   हर   हस्तियाँ  ग़ज़ल में/5/

गुलशन  से  ही  नदारद   जब  हो  गईं  बहारें
लाऊँ  कहाँ से  बोलो तो  तितलियाँ  ग़ज़ल में/6/

होता  अगर  असर  जो आहों में मुफलिसों के
बेहतर  जरा  सी   होतीं   दुश्वारियांँ  ग़ज़ल में/7/

किस्मत से  रोज़  अपनी  इक जंग लड़ रहे हैं 
इस वज्ह भी दिखी है कुछ सख्तियाँ ग़ज़ल में/8/

नफरत  भरे   जहाँ  को   दरकार  है मुहब्बत 
मत  दिल दुखाने वाली दो अर्जियाँ ग़ज़ल में/9/

प्यासा  बहुत है दिखता इस दौर का हर इंसा
बारिश करो मुहब्बत की अब मियांँ ग़ज़ल में/10/

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